हिन्दी पखवाड़ा विशेष

निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।

बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।।

अंग्रेज़ी पढ़ि के जदपि, सब गुन होत प्रवीन।
पै निज भाषाज्ञान बिन, रहत हीन के हीन।।

उन्नति पूरी है तबहिं जब घर उन्नति होय।
निज शरीर उन्नति किये, रहत मूढ़ सब कोय।।

निज भाषा उन्नति बिना, कबहुँ न ह्यैहैं सोय।
लाख उपाय अनेक यों भले करो किन कोय।।

इक भाषा इक जीव इक मति सब घर के लोग।
तबै बनत है सबन सों, मिटत मूढ़ता सोग।।

और एक अति लाभ यह, या में प्रगट लखात।
निज भाषा में कीजिए, जो विद्या की बात।।

तेहि सुनि पावै लाभ सब, बात सुनै जो कोय।
यह गुन भाषा और महं, कबहूँ नाहीं होय।।

विविध कला शिक्षा अमित, ज्ञान अनेक प्रकार।
सब देसन से लै करहू, भाषा माहि प्रचार।।

भारत में सब भिन्न अति, ताहीं सों उत्पात।
विविध देस मतहू विविध, भाषा विविध लखात।।

सब मिल तासों छाँड़ि कै, दूजे और उपाय।
उन्नति भाषा की करहु, अहो भ्रातगन आय।। भारतेन्दु हरिश्चंद्र

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CELEBRATION OF DR RANGANATHAN’S BIRTHDAY

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INTRODUCTION

LIFE SPAN:

(09 th August 1892 – 27 th September 1972)

Ranganathan, born on 12[1] August 1892 to Ramamrita, in Siyali (at present, Sirkazhi) in British-ruled India at Tanjavoor (at present, Nagapattinam) District, Tamil Nadu.[1]

Ranganathan began his professional life as a mathematician; he earned B.A. and M.A. degrees in mathematics from Madras Christian College in his home province, and then went on to earn a teaching license. His lifelong goal was to teach mathematics, and he was successively a member of the mathematics faculties at universities in Mangalore, Coimbatore and Madras). As a mathematics professor, he published papers mainly on the history of mathematics. His career as an educator was somewhat hindered by stammering (a difficulty he gradually overcame in his professional life). The Government of India awarded Padmashri to Dr. S.R. Ranganathan in 1957 for valuable contributions to Library Science.

WRITINGS OF DR RANGANATHAN

 

 1
Five Laws of Library Science
by S.R. Ranganathan
 
 2
Colon Classification
by S.R. Ranganathan
 3
Prolegomena to Library Classification:
by S.R. Ranganathan, S.R. Ranganathan
 4
Ramanujan: The Man and the Mathematician (Reprint, 1967)
by S.R. Ranganathan
 5
Library Book Selection
by S.R. Ranganathan, S.R. Ranganathan
7
Reference Service
by S.R. Ranganathan
 8
New Education and School Libraries: Experience of Half a Century
by S.R. Ranganathan, P. Jayarajan
 9
Philosophy of Library Classification
by S.R. Ranganathan
 
 10
Cataloguing Practice
by S.R. Ranganathan
 11
Documentation-Genesis & Development
by S.R. Ranganathan
12
Library Manual for Schools, College and Public Libraries
by S.R. Ranganathan
13
Library Manual
by S.R. Ranganathan
 14
Philosophy of Library Classification
by S.R. Ranganathan
 15
Physical Bibliography For Librarians
by S.R. Ranganathan
 16
Suggestions for the Organization of Libraries in India
by S.R. Ranganathan
17
Descriptive Account Of Colon Classification
by S.R. Ranganathan
18
Classified Catalogue Code: With Additional Rules for Dictionary Catalogue Code
by S.R. Ranganathan, S.R. Ranganathan
19
New Education and School Library
by S.R. Ranganathan, P. Jayarajan (Contributor)
  
 20
مبادئ تصنيف المكتبات
by S.R. Ranganathan (ش.ر.رنجاناثان)
 21
A Librarian Looks Back: An Autobiography Of Dr. S.R. Ranganathan
by S.R. Ranganathan, P.N. Kaula
 
22
Library Administration
by S.R. Ranganathan
 
 23
Reference Service
by S.R. Ranganathan

CELEBRATING INDEPENDENCE DAY

1760.jpgSWATANTRA DIWAS SAMAROH (8 AUG -15 AUG) was celebrated with full zeal and enthusiasm in KV,IFFCO, GANDHIDHAM. Various activities like Group song (patriotic ), essay writing, slogan writing, painting competition, Prabhat pheri, flag hoisting and a marvelous participation in march past and group dance of main function of IFFCO.

15TH AUGUST 2017
PRABHAT PHERI

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Farewell

Mrs Nalini Thackar, PRT retired yesterday after completing 60 yrs of age and her tenure in KVS.She had served more than 30 yrs in KVS. The Vidyalaya organised her farewell party and launch in her honour.Very emotional environment during farewell speeches. All appreciated her dedication and ability along with her behavior with colleagues.IMG_20170331_122757IMG_20170331_144826

पुस्तकालय नियम संहिता

केन्द्रीय विद्यालय, इफको, गांधीधाम
ग्रन्थालयी सदा-सेवी पञ्च-सूत्री परायण: ।
ग्रन्था अध्येतुम् – एते च सर्वेभ्यः स्वं स्वम्-आप्नुयुः ।।
अध्येतुः समयं शेषेत्-आलयो नित्यमेव च ।
वर्धिष्णुरेष चिन्मूर्ति: पञ्च-सूत्री चिरं जयेत् ।।
डा रंगनाथन प्रदत्त पुस्तकालय विज्ञान के पंच मूलभुत सिद्धांत यथा मानव देह हेतु छीति, जल, पावक, गगन एवं समीर
पुस्तकालय नियम संहिता
1. विद्यालय के प्राचार्य, सभी विद्यार्थी, शैक्षिक व शिक्षकेतर कर्मचारी मानद सदस्य है ।
2. पुस्तकालय उपयोग का समय : 7:30 – 1:40 (ग्रीष्मकालीन)
8:00 – 2:10 (शरदकालीन)
टिप्पणी : (क) यथासमय विद्यालय के समय में हुए बदलाव के अनुसार ही पुस्तकालय खुलेंगा ।
(ख) पुस्तकालय,विद्यालय में अवकाश की कालअवधि में सेवाएँ उपलब्ध कराने में अक्षम रहेगा ।
3.केविसं की नवीन पुस्तकालय नीति 2012 के अनुसार, प्रत्येक विद्यार्थी एक समय में दो पुस्तकें पुस्तकालय से अगले दो सप्ताह हेतु निर्गत कर सकता है ।
4. प्रत्येक शिक्षक/शिक्षिका या कर्मचारी एक समय में पांच पुस्तकें अगले एक महीनें हेतु निर्गत कर सकता है ।
5. पुस्तकें या पुस्तकेतर सामग्रीयाँ केवल पुस्तकालय कालांश में ही निर्गत की जायेंगी ।पाठन सामग्रीयों की वापसी -निर्गमन की प्रक्रिया शैक्षिक कालांशों में नही सम्पन्न की जायेगी ।
6.पुस्तकालय की पठन सामग्रीयों यथा पुस्तकें, पत्रिकाएँ, समाचार पत्र, डिजीटल सामग्री आदि को चिन्हीत करना, रेखांकीत करना या पृष्ठों पर कुछ भी यत्र तत्र लिखना सर्वथा वर्जित है ।
7. संदर्भ पुस्तकें एवं पत्रिकाओं की अद्यतन प्रति किसी भी सदस्य को निर्गत नही की जायेगी । इनका उपयोग केवल पाठक आगार में ही परिसिमित है ।
8. यदि निर्गत पुस्तकें/पुस्तकेतर सामग्री देय तिथि तक नही वापस की गयी तो इसे गंभीरता से अवलोकन में लिया जायेगा तथा नियमानुसार दण्ड स्वरूप शुल्क लिया जायेगा ।
यथा सभी शैक्षिक एवं शिक्षकेत्तर कार्मचारियों हेतु देय तिथि के उपरांत प्रति दिन प्रति पुस्तक रूपये एक मात्र की दर से ।
9. पुस्तकालयाध्यक्ष कोई भी निर्गत पुस्तक बीना कारण बताये किसी भी समय मंगवाने के लिए अधिकृत है ।चाहे वह समय देय तिथि से पहले ही क्यों न हो ।
10. यदि पुस्तकों का दुरूपयोग , या अव्यवस्थित उपयोग या खो जाना, पाया जाता है तो उस सम्बन्धित सदस्य को उस पुस्तक की दुसरी प्रति जमा करवानी होगी या पुस्तक के तत्कालिक बाजार मूल्य को विद्यालय कोष में जमा करवाना पड़ेगा ।
11. पाठक आगार में पुस्तकों/पत्रिकाओं/समचार पत्रों आदि के पठन के उपरांत उनके उचित स्थान पर ही रखें ।आप पाठकों का सहयोग अपेक्षित है ।
12. मानद सदस्य पुस्तकालय के चल सामग्री/असबाव/सज्जा सामग्री/उपकरणों आदि का उचित ध्यान रखें ।जैसी पुस्तकालय की सुन्दरता आपके आगमन के समय निखर रही थी वैसी ही सुन्दरता आपके गमन के समय भी अक्षुण्ण रहें ।
13. पुस्तकालय कक्ष के अंदर किसी प्रकार के खान पान /पार्टी/भोज आदि की अनुमति नही है ।
14. पुस्तकालय का संगणक केवल शैक्षिक कार्य निष्पादन हेतु है ।संगणक की सेटींग के साथ कोई छेड़छाड़ न करें ।इंटरनेट के सुरक्षा निर्देशों का पुर्णतः पालन करें ।
15. प्रत्येक विद्यार्थी विद्यालय से अपने स्थानांतरण/निष्कासन के समय पुस्तकालयाध्यक्ष से एक अनापत्ति प्रमाणपत्र अवश्य प्राप्त करेगा ।
16. पुर्णतः व्यवस्था एवं मौन पुस्तकालय में बनाये रखना प्रत्येक सदस्य का कर्त्तव्य है ।यदि अति आवश्यक हो तो धीरे व मधुर स्वर में बोलें ।
*आपका सहयोग ही हमारी संचित निधि है ।*