केवि,ईफको,गांधीधाम,पुस्तकालय

पुस्तक प्रदर्शनी/BOOK EXHIBITION

160 नई आयी पुस्तको की प्रदर्शनी नेअनोखा समा बांध दिया.इस तरह विधिवत सम्पन्न हुआ राष्ट्रीय पुस्तकालय सप्ताह २०१७ ।सभी कक्षा के छात्रों और छात्राओं ने उत्साह पुर्वक प्रदर्शनी का अवलोकन किया ।

 

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केवि,ईफको,गांधीधाम,पुस्तकालय

पर्यटन पर्व (05 अक्टुबर -25 अक्टुबर 2017)

केंद्रीय विद्यालय इफको गांधीधाम

पर्यटन पर्व(05-25 अक्टुबर 2017)

प्रतिवेदन

केंद्रीय विद्यालय इफको गांधीधाम मे पर्यटन पर्व(06-25 अक्टुबर 2017) बिधिवत तरीके से उत्साह व उल्लास के साथ मनाया गया . अर्ध वार्षिक परीक्षा के बावजूद अनेक गतिविधियाँ मनायी गयी .निबंध लेखन(6-10 कक्षा), प्रश्नोतरी प्रतियोगिता(6 -9 कक्षा), वाद विवाद प्रतियोगिता (8-10 कक्षा) इनमें प्रमुख हैं .25.10.2017 को समापन के अवसर पर प्रातःकालीन सभा में प्रदर्शित पर्यटन स्थलों की तख्तियां विशेष आकर्षण रही .

दृश्यावलोकन के अंतर्गत भुज नगर के ऐतिहासिक एवम धार्मिक स्थलो का कक्षा 8-10 तक के छात्र /छात्राओं को अवलोकन करवाया गया.पूरी बस 37 विद्यार्थियोंव 4 शिक्षक/ शिक्षिकाओंको लेकर गयी. ऐतिहासिक संग्रहालय(MUSEUM), स्वामी नारायण मंदिर , आईना महल, प्राग महल, भुजोडी संग्रहालयादि का भ्रमण करवाया गया.

इस प्रकार केंद्रीय विद्यालय इफको गांधीधाम ने यह पर्व सम्पुर्णरूपेण मनाया.

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KENDRIYA VIDYALAYA, IFFCO, GANDHIDHAM

PARYATAN PARV

LIST OF STUDENTS

For Bhuj tour

24.10.2017

 

SL NO BOYS CLASS SL NO GIRLS CLASS
1 ADITYA 10 20 SHREYA.D 10
2 PRATIK.G 10 21 NANDANA 9
3 PRANAV 10 22 PARVATHI 9
4 VIRENDRA 10 23 MALVIKA 9
5 VAIBHAV 10 24 ARZOO 9
6 RITESH 9 25 SWAGATIKA 9
7 ASHISH 9 26 ROSHNI 9
8 AYUSH 9 27 AUMIKA 8
9 DEEP 9 28 SOUMYA 8
10 ABHIJIT 9 29 SHRIYA 8
11 AYUSH 8 30 SNEHA 8
12 NAITIK 8 31 ANJALI 8
13 KARAN 8 32          SREERAGH 10
14 TARUN 8 33 PARTH 10
15 NISHANT 8 34 BHUVANESH 10
16 DHRUV 8 35 AARTI 8
17 HARSH 8 36 AASHKA 8
18 PRASAD JAGTAP 8 37 RAKSHITA 8
19 ROHAN 8      

 

केवि,ईफको,गांधीधाम,पुस्तकालय

हिन्दी पखवाड़ा विशेष

निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।

बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।।

अंग्रेज़ी पढ़ि के जदपि, सब गुन होत प्रवीन।
पै निज भाषाज्ञान बिन, रहत हीन के हीन।।

उन्नति पूरी है तबहिं जब घर उन्नति होय।
निज शरीर उन्नति किये, रहत मूढ़ सब कोय।।

निज भाषा उन्नति बिना, कबहुँ न ह्यैहैं सोय।
लाख उपाय अनेक यों भले करो किन कोय।।

इक भाषा इक जीव इक मति सब घर के लोग।
तबै बनत है सबन सों, मिटत मूढ़ता सोग।।

और एक अति लाभ यह, या में प्रगट लखात।
निज भाषा में कीजिए, जो विद्या की बात।।

तेहि सुनि पावै लाभ सब, बात सुनै जो कोय।
यह गुन भाषा और महं, कबहूँ नाहीं होय।।

विविध कला शिक्षा अमित, ज्ञान अनेक प्रकार।
सब देसन से लै करहू, भाषा माहि प्रचार।।

भारत में सब भिन्न अति, ताहीं सों उत्पात।
विविध देस मतहू विविध, भाषा विविध लखात।।

सब मिल तासों छाँड़ि कै, दूजे और उपाय।
उन्नति भाषा की करहु, अहो भ्रातगन आय।। भारतेन्दु हरिश्चंद्र